सोचो और समझो सनातनियों,
इतिहास में पहली बार है कि मुस्लिम देशों पर बम बरस रहे हैं और मुस्लिम जगत ताली बजा रहा है। कितनी अजीब बात है कि पूरी दुनिया में इस्लाम को फैलाने के लिए पेट्रो डॉलर की नदी बहाने वाले अरब देश बर्बाद हो रहे हैं और मुस्लिम उम्माह खुशी से उछल रहा है। अगर आप सोच रहे हैं कि ये लड़ाई अमेरिका की है तो आप गलत हैं। अमेरिका को ईरान से कोई खतरा नहीं है। वो अगर इस लड़ाई को छोड़कर चला जाता है तो उसका कुछ बिगड़ने वाला नहीं है। ये लड़ाई पूरी तरह से इजराइल और अरब मुल्कों की है। ईरान में इजराइल के खात्मे का नारा लगाया जाता है, इसलिए ये लड़ाई उसके लिए जीवन-मरण का प्रश्न है। डोनाल्ड ट्रंप जानबूझकर जंग खत्म करके जाने की बात कर रहे हैं क्योंकि वो जानते हैं कि उनके जाने के बाद ईरान अरब देशों को बर्बाद कर देगा। अरब देश ईरान के खतरे को हमेशा के लिए खत्म कर देना चाहते हैं इसलिए ये जंग जल्दी खत्म होने वाली नहीं है। बेशक अरब देश इस जंग में इजराइल के साथ नजर न आ रहे हों लेकिन सच ये है कि ईरान के बारे में उनकी सोच इजराइल से अलग नहीं है। ईरान इस समय इजराइल से भी बड़ा खतरा अरब देशों के लिए बन गया है, इसलिए वो अमेरिका को इस युद्ध से निकलने नहीं देंगे। अमेरिका अच्छी तरह जानता है कि वो किसकी लड़ाई लड़ रहा है इसलिए वो अरब देशों से युद्ध का खर्च मांग रहा है । जहाँ तक ईरान की बात है, उसने बड़े-बड़े आतंकवादी संगठन खड़े कर दिए हैं इसलिए उसे एक आतंकवादी देश कहना गलत नहीं है। इसकी सेना भी एक तरह से आतंकवादी संगठन है। अमेरिका कितना भी स्वार्थी देश हो, डोनाल्ड ट्रंप कितना भी बड़ा पागल हो, लेकिन इस समय वो दुनिया को बचाने की जंग लड़ रहा है। यह बात आज बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल जलगांव महाराष्ट्र प्रवास के दौरान अपने उद्बोधन पर बताई।
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